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पुनरीिण के समय उहचत हनधाडरण का हनयत ककया जाना – उन भूहमयों की दशा में, हजन पर कक हनधाडरण ककसी ऐसे प्रयोजन के हलए ककया जा रहा हो हजसके कक संबंध में उनका हनधाडरण पुनरीिण के ठीक पूवड ककया जा चुका था, वह हनधाडरण जो कक इस प्रकार संगहणत ककया गया हो, कृहष भूहम की दशा में, उस भू-राजस्व या लगान के, जो पुनरीिण के ठीक पूवड देय हो, डेढ़ गुने से अहधक होता हो तथा अन्य भूहमयों की दशा में, उस भू-राजस्व या लगान के, जो पुनरीिण के ठीक पूवड देय हो, छह गुने से अहधक होता हो, तो हनधाडरण कृहष भूहम की दशा में , ऐसे भू-राजस्व या लगान के डेढ़ गुने के हहसाब से तथा अन्य भूहमयों की दशा में, ऐसे भू-राजस्व या लगान के छह गुने के हहसाब से हनयत ककया जाएगा : परन्तु जहां कृहष के प्रयोजन के हलए धाररत ककसी खाते में उसके धारक द्वारा या उसके धारक के व्यय पर ककसी भी समय कोई सुधार ककया गया हो, वहाँ ऐसे खाते का हनधाडरण इस प्रकार हनयत ककया जाएगा मानो कक वह सुधार ककया ही नहीं गया था।