Bare Acts › The MP Dakaiti &amp The Vyapharan Prbhavit Kshetra Act, 1981

Section 15

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सभपवि की नियुम्तत- (1) सभपवि के िारा 14 के अिीि कुकि कर लिए जािे पर, उसका स्िामी, कुकी की जािकारी की तारीि से तीि मास के भीतर, म्जिा मम्जस् रेट को अभ्यािेदि कर सकेगा म्जसमें िे पररम्स्थनियाां तथा सािि, म्जिमें म्जिके व्दारा िह सभपवि उसके व्दारा अम्जित की गई थी, दलशित क्रकए जायेंगे । (2) यर्द म्जिा मम्जस्रेट का अभ्यािेदि से समािाि हो जाता है, तो िह उस सभपवि को कुकी से तत्काि निमुतत कर सकेगा, और तदुपरर िह सभपवि तथा अन्त: कािीि िाभ उस सभपवि पर भाररत समस्त व्ययों की कटौती कर िी जािे के पश्चात् उस सभपवि के स्िामी में निर्हत हो जायेंगे । 16 सभपलस के अजिि के स्िरूप के बारे में विशेष न्यायाियों व्दारा जाांच—(1) यर्द म्जिा मम्जस्रेट की िारा 15 की उपिारा (1) के अिीि क्रकये गए अभ्यािेदि से समािाि िहीां होता तो िह उस मामिे को, अपिी ररपोटि के साथ उस विशेष न्यायािय के पास, जो आधिकाररता रिता हो, यह विनिश्चय करिे के लिये भेजेगा क्रक तया िह सभपवि या उसका कोई भाग कोई विनिर्दिष्ट अपराि करके अम्जित क्रकया गया था या िहीां । (2) विशेष न्यायािय को, उपिारा (1) के अिीि उसे निर्दिष्ट क्रकये गये क्रकसी मामिे का विनिश्चय करते समय, लसविि न्यायािय की िे समस्त शम्ततयााँ होंगी जो लसविि प्रक्रक्रया सांर्हता, 1908 (1908 का सां० 5) के अिीि क्रकसी िाद का विचारण करते समस लसविि न्यायािय को होती है । ४०। 9111 -3 (3) इस िारा के अिीि क्रकन्हीां कायििार्हयों में, यह साबबत करिे का भार क्रक अभ्या- बेदि में िखणित सभपवि या उसका कोई भाग कोई विनिर्दिष्ट अपराि करके अम्जित िहीां क्रकया गया था, उस व्यम्तत पर होगा जो उस सभपवि का दािा करता हो, भिे ही साक्ष्य अधिनियम, 1872(1872 का सां० 1) में कोई भी बात अन्तवििष्ट तयों ि हो ।