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लोक परिसिों कȯ बाबत् ककिायȯ या िुकसािी का भुिताि अपȯक्षित कििȯ की शक्तत - - (1) जहााँ 5 ककसी व्यक्तत पर ककतहीं लȪक पररसरों का दȯय ककराया बकाया हȪ, िहााँ सिम प्राधिकारी, आदȯश द्िारा, उस व्यक्तत सȯ यह अपȯिा कर सकȯ िा कक िह उसका भुितान 1[ऐसȯ समय कȯ भीतर तथा ऐसी ककचतों मɅ] कर दȯ जȰसȯ कक उस आदȯश मɅ विननददाष्ट्ट हȪ । (2) जहााँ कȪई व्यक्तत ककतहीं लȪक पररसरों पर अप्राधिकृत अधिभȪि रखȯ हुए हȪ या ककसी भी समय उन पर अप्राधिकृत अधिभȪि रखȯ हȪ, िहााँ सिम प्राधिकारी, नुकसानी कȯ ननिाारण कȯ ऐसȯ लसƨाततों कȪ, जȰसȯ कक विदहत ककए जाएाँ, ध्यान मɅ रखतȯ हुए ऐसȯ पररसरों कȯ उपयȪि तथा अधिभȪि मƧȯ नुकसानी का ननिाारण कर सकȯ िा और आदȯश द्िारा उस व्यक्तत सȯ यह अपȯिा कर सकȯ िा कक िह ऐसȯ समय कȯ भीतर तथा ऐसी ककचतों मɅ, जȰसा कक उस आदȯश मɅ विननददाष्ट्ट हȪ, नुकसानी का भुितांन कर दȯ । (3) उपिारा (1) या उपिारा (2) कȯ अिीन कȪई भी आदȯश ककसी भी व्यक्तत कȯ विǽƨ तब तक नहीं ककया जाएिा जब तक कक उस व्यक्तत कȪ एक ललखखत सूचना उससȯ, ऐसȯ समयं कȯ भीतर जȰसा कक सूचना मɅ विननददाष्ट्ट हȪ, इस संबंि मɅ कारण दशाानȯ की कक ऐसा आदȯश तयों न ककया जाए, अपȯिा करतȯ हुए जारी न कर दी िई हȪ और जब तक कक उसकी उन आपक्ततयों पर, यदद कȪई हȪ, तथा ककसी ऐसȯ साध्य पर, क्जसȯ कक िह उनकȯ समथान मɅ पȯश करȯ, सिम प्राधिकारी द्िारा विचार न कर ललया िया हȪ ।