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िनयमᲂ का पर्काशन—(1) 5[धारा 32] ᳇ारा पर्दᱫ िनयम बनाने की शिक् त इस शतर् के अध्यधीन होगी िक िनयम पूवर् पर्काशन के पश् चात् बनाए जाएं । (2) साधारण खण्ड अिधिनयम, 1897 (1897 का 10) की धारा 23 के खण्ड (3) के अनुसार िविनिदष् ट की जाने वाली वह तारीख, िजसके पश् चात् उन िनयमᲂ के पर्ारूप पर िवचार िकया जाएगा जो धारा 32 6*** के अधीन बनाए जाने के िलए पर्स्थािपत हᲂ, उस तारीख से तीन मास कम की न होगी िजसको पर्स्थािपत िविनयमᲂ का पर्ारूप सवर्साधारण की जानकारी के िलए पर्कािशत िकया गया था । (3) इस पर्कार बनाए गए िनयम 7*** 8*** शासकीय राजपतर् मᱶ पर्कािशत िकए जाएंगे और ऐसे पर्काशन पर ऐसा पर्भाव रखᱶगे मानो वे इस अिधिनयम मᱶ अिधिनयिमत हᲂ । 9[35. पर्ितकर के रूप मᱶ िदए गए धन के अन्तरण के िलए अन्य देशᲂ के साथ िकए गए ठहरावᲂ को िकर्यािन्वत करने के िलए िनयम—10[(1)] केन्दर्ीय सरकार इस अिधिनयम के अधीन आयुक् त के 11[पास िनिक्षप् त] ऐसे धन को, 12[जो ऐसे ᳞िक् त को अिधिनणᱮत 1 िविध अनुकूलन आदेश, 1937 ᳇ारा खण्ड (ज) के अन्त मᱶ “और” शब्द तथा मूल खण्ड (झ) का लोप िकया गया तथा धारा 33 के खण्ड (क) से (च) तक को खण्ड (झ) से (ढ) के रूप मᱶ पुनःअक्षरांिकत और अंतःस्थािपत िकया गया । 2 1960 के अिधिनयम सं० 58 की धारा 3 ᳇ारा “और” शब्द का लोप िकया गया । 3 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 16 ᳇ारा (1-6-1959 से) अन्तःस्थािपत । 4 1986 के अिधिनयम सं० 4 की धारा 2 और अनुसूची ᳇ारा (15-5-1986 से) अन्तःस्थािपत । 5 भारत शासन (भारतीय िविध अनुकूलन) आदेश, 1937 ᳇ारा “धारा 32 और धारा 33” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 6 भारत शासन (भारतीय िविध अनुकूलन) आदेश, 1937 ᳇ारा “या धारा 33” शब्दᲂ और अंकᲂ का िनरसन िकया गया । 7 भारत शासन (भारतीय िविध अनुकूलन) आदेश, 1937 ᳇ारा “यथािस्थित” शब्द का िनरसन िकया गया । 8 भारत शासन (भारतीय िविध अनुकूलन) आदेश, 1937 ᳇ारा “भारत का राजपतर् या” शब्दᲂ को िनरिसत िकया गया । 9 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 20 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 10 1937 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 2 ᳇ारा धारा 35 को उस धारा की उपधारा (1) के रूप मᱶ पुनःसंख्यांिकत िकया गया । 11 1937 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 2 ᳇ारा “संदᱫ” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 12 1937 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 2 ᳇ारा “के फायदे के िलए” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 22 हुआ हो या शोध्य हो] जो 1*** 2[िकसी िवदेश मᱶ] िनवास करता है या करने जा रहा है, 3[ऐसे िवदेश मᱶ] अन्तिरत को िकर्यािन्वत करने के िलए िनयम अंतिरत करने के िलए, और 4[कमर्चािरयᲂ] के पर्ितकर से सम्बिन्धत िविध के अधीन 5*** 6*** 7*** 7[िनिक्षप् त] िकसी ऐसे धन की, 8[जो िकसी ऐसे ᳞िक् त को अिधिनणᱮत हुआ हो, या शोध्य हो] जो 9[िकसी राज्य] मᱶ िनवास करता है या करने जा रहा है, 9[िकसी राज्य] मᱶ पर्ािप् त 10[िवतरण] और पर्शासन के िलए िनयम, शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, बना सकेगी]:] 10[परन्तु पर्ाणान्तक दुघर्टनाᲐ के सम्बन्ध मᱶ इस अिधिनयम के अधीन िनिक्षप् त कोई भी रािश, संपृक् त िनयोजक की सम्मित के िबना, तब अनुसार इस पर्कार अन्तिरत कर िदया गया है वह गए िनयमᲂ का संसद् के समक्ष रखा जाना—इस अिधिनयम के अधीन केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा बना 1 [धारा ए] उन क्षितयᲂ की सूची िजनके बारे मᱶ जाता है िक उनके पिरणामस्वरूप कर्म संख्यांक क्षित का वणर्न उपाजर्न सामथ्यर् की तक ऐसे अन्तिरत न की जाएगी जब तक रािश पर्ाप् त करने वाले आयुक् त ने धारा 8 की उपधाराᲐ (4) और (5) के उपबन्धᲂ के अधीन उसके िवतरण और पर्भाजन को अवधािरत करने वाला आदेश पािरत न कर िदया हो । (2) जहां िक आयुक् त के पास िनिक्षप् त धन, इस धारा के अधीन बनाए गए िनयमᲂ के ां, आयुक् त के पास िनिक्षप् त पर्ितकर के स्वयं उसके ᳇ारा िवतरण के सम्बन्ध मᱶ इस अिधिनयम मᱶ अन्यतर् अंतिवष् ट उपबंध ऐसे िकसी धन के िवषय मᱶ लागू रह जाएंगे । 11[36. केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा बनाए या गया पर्त्येक िनयम बनाए जाने के पश् चात् यथाशीघर्, संसद् के पर्त्येक सदन के समक्ष, जब वह सतर् मᱶ हो, तीस िदन की अविध के िलए रखा जाएगा । यह अविध एक सतर् मᱶ अथवा 12[दो या अिधक आनुकर्िमक सतर्ᲂ मᱶ पूरी हो सकेगी ।] यिद उस सतर् के या पूवᲃक् त आनुकर्िमक सतर्ᲂ के ठीक बाद के सतर् के अवसान के पूवर् दोनᲂ सदन उस िनयम मᱶ कोई पिरवतर्न करने के िलए सहमत हो जाएं तो तत्पश् चात् वह ऐसे पिरवितत रूप मᱶ ही पर्भावी होगा । यिद उक् त अवसान के पूवर् दोनᲂ सदन सहमत हो जाएं िक वह िनयम नहᱭ बनाया जाना चािहए तो तत्पश् चात् वह िनष्पर्भाव हो जाएगा । िकन्तु िनयम के ऐसे पिरवितत या िनष्पर्भाव होने से उसके अधीन पहले की गई िकसी बात की िविधमान्यता पर पर्ितकूल पर्भाव नहᱭ पड़ेगा ।] 13[अनुसूची 2(1) और 4 देिख 14[भाग 1 समझा स्थायी पूणर् आंिशक िनःशक् तता हुई हᱹ] हािन का पर्ितशत