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िस्ट्तावेिों को रजिस्ट्रीकरण के जिए उपस्ट्थाजपत करिे वािे व्यज त—2[िाराओं 31, 88 और 89] में वर्णणत िशाओं को छोडकर, इस अजिजियम के अिीि रजिस्ट्रीकृत की िािे वािी हर िस्ट्तावेि, चाहे ऐसा रजिस्ट्रीकरण अजिवायण हो चाहे वैकजल्पक हो, समुजचत रजिस्ट्रीकरण कायाणिय में जि् िजिजित व्यज तयों द्वारा उपस्ट्थाजपत की िाएगी :— (क) उसे जिपादित या उसके अिीि िावा करिे वािा या दकसी जिक्री या आिेश की प्रजत की िशा में उस जिक्री या आिेश के अिीि िावा करिे वािा कोई भी व्यज त, अथवा (ि) ऐसे व्यज त का प्रजतजिजि या समिुिेजशती, अथवा (ग) ऐसे व्यज त, प्रजतजिजि या समिुिेजशती का ऐसा अजभकताण िो एतजस्ट्मि प चात वर्णणत रीजत से जिपादित और अजिप्रमाणीकृत मुखतारिामे द्वारा स्यक रूप से प्राजिकृत दकया गया है । 3[32क. िोिोजचत्र, आदि का अजिवायणतः िगाया िािा—िारा 32 के अिीि समुजचत रजिस्ट्रीकरण कायाणिय में कोई िस्ट्तावेि उपस्ट्थाजपत करिे वािा प्रत्येक व्यज त उस िस्ट्तावेि पर अपिे पासपोिण आकार का िोिोजचत्र और अंगुिी-छाप िगाएगाः परधतु िहां ऐसी िस्ट्तावेि स्ट्थावर संपजत्त के स्ट्वाजमत्व के अंतरण से संबंजित है वहां िस्ट्तावेि में वर्णणत ऐसी संपजत्त के प्रत्येक क्रेता और जवक्रेता के पासपोिण आकार के िोिोजचत्र और अंगुिी-छाप भी िस्ट्तावेि पर िगाए िाएंगे ।]