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िस्ट्तावेिों को उपस्ट्थाजपत करिे के जिए समय—िाराओं 24, 25 और 26 में अधतर्वण ि उपबधिों के अध्यिीि रहते हुए यह है दक जवि से जभध ि कोई भी िस्ट्तावेि रजिस्ट्रीकरण के जिए उस िशा के जसवाय प्रजतगृहीत ि की िाएगी जिसमें अपिे जिपािि की तारीि से चार मास के अधिर वह समुजचत आदिसर के समि इस प्रयोिि के जिए उपस्ट्थाजपत कर िी गई होः परधतु जिक्री या आिेश की प्रजत, जिक्री या आिेश के दकए िािे के दिि के दिि से चार मास के अधिर या िहां दक वह अपीििीय है वहां अपिे अजधतम होिे की तारीि से चार मास के अधिर उपस्ट्थाजपत की िा सकेगी । 1[23क. कुछ िस्ट्तावेिों का पुिः रजिस्ट्रीकरण—इस अजिजियम में अधतर्वण ि दकसी प्रजतकूि बात के होते हुए भी यदि रजिस्ट्रीकरण के जिए अपेजित िस्ट्तावेि दकसी मामिे में रजिस्ट्रीकरण के जिए रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार द्वारा ऐसे व्यज त से, िो उसे प्रजतस्ट्थाजपत करिे के जिए स्यक रूप से सश त िहीं है, प्रजतगृहीत कर िी गई है, और रजिस्ट्रीकृत कर िी गई है, तो ऐसी िस्ट्तावेि से व्युत्पध ि अजिकार के अिीि िावा करिे वािा कोई भी व्यज त अपिे को यह िािकारी प्रथम बार जमििे पर दक ऐसी िस्ट्तावेि का रजिस्ट्रीकरण अजवजिमाधय है ऐसी िस्ट्तावेि को भाग 6 के उपबधिों के अिुसार उस जििे के रजिस्ट्रार के कायाणिय में पुिः रजिस्ट्रीकरण के जिए ऐसी िािकारी से चार मास के अधिर उपस्ट्थाजपत कर सकेगा, या करा सकेगा जिसमें वह िस्ट्तावेि मूितः रजिस्ट्रीकृत की गई थी और रजिस्ट्रार अपिा यह समािाि हो िािे पर दक वह िस्ट्तावेि रजिस्ट्रीकरण के जिए ऐसे व्यज त से, िो उसके उपस्ट्थाजपत करिे के जिए स्यक रूप से सश त िहीं था । ऐसे प्रजतगृहीत की गई थी, उस िस्ट्तावेि के पुिः रजिस्ट्रीकरण के जिए ऐसे अग्रसर होगा मािो 1 1917 के अजिजियम सं० 15 की िारा 2 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 7 वह पहिे रजिस्ट्रीकृत िहीं की गई थी और मािो पुिः रजिस्ट्रीकरण के जिए ऐसा उपस्ट्थापि रजिस्ट्रीकरण के जिए भाग 4 के अिीि अिुज्ञात समय के अधिर रजिस्ट्रीकरण के जिए उपस्ट्थापि है और िस्ट्तावेिों के रजिस्ट्रीकरण के बारे में इस अजिजियम के सब उपबधि ऐसे पुिः रजिस्ट्रीकरण को िागू होंगे और यदि ऐसी िस्ट्तावेि इस िारा के उपबधिों के अिुसरण में स्यक रूप से पुिः रजिस्ट्रीकृत कर िी िाए तो सब प्रयोििों के जिए वह अपिे मूि रजिस्ट्रीकरण की तारीि से स्यक रूप से रजिस्ट्रीकृत समझी िाएगीः परधतु ऐसी िस्ट्तावेि से व्युत्पध ि अजिकार के अिीि, जिसे यह िारा िागू है, िावा करिे वािा कोई भी व्यज त 1917 के जसत्बर के बारहवें दिि से तीि मास के अधिर उसे इस िारा के अिुसरण में पुिः रजिस्ट्रीकरण के जिए उपस्ट्थाजपत कर सकेगा, या करा सकेगा, चाहे वह समय कोई भी यों ि रहा हो िबदक उसे इस बात की प्रथम बार िािकारी हुई थी दक िस्ट्तावेि का रजिस्ट्रीकरण अजवजिमाधय था ।]